प्रयास –The Effort

विश्व हिंदी संस्थान

हिंदी प्रचार हेतु अंतरराष्ट्रीय प्रयास

प्रयास” – The Effort” विश्व हिंदी संस्थान कल्चरल आर्गेनाईजेशन, कनाडा का प्रकाशन 

हिंदी का सूर्य कभी अस्त नहीं होता है – प्रो. सरन घई 

Prayas Patrika 

द्वितीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्यिक सम्मेलन 2019, कनाडा

13 अगस्त से 20 अगस्त, 2019

टोरंटो, आटवा, ब्रैम्प्टन, नियाग्रा फ़ाल्स, 1000 आइलैंड्स

(स्ववित्तपोषितता पर आधारित)

13/8/2019 Departure from home country.

14/8/2019 1 AM – Arrival at Pearson Airport, 2 AM – Airport to Hotel, 8 AM –Breakfast, 11.30 AM – Lunch, 1 PM – Departure for Thousand Islands Hotel, 4 PM – arrival at Hotel (Thousand Islands), 7 PM – Dinner

15/8/2019 7 AM – Breakfast, 8 AM departure for Ottawa, 10 AM – Flag hoisting High Commission Residence, 1 PM – Lunch, 2 PM – Visit Canada Parliament. 6 PM – Independence Day Celebration with High Commission, Ottawa. 10 PM – Departure for Toronto Hotel

16/8/2019 2 AM – Arrival at Hotel, 8 am – Breakfast, Day Time –Walmart/Brmlea City Centre Mall visit, 5 to 9 PM “Sur, Saj Aur Sangeet” (Musical Hangama). 9 PM Dinner and DJ.

17/8/2019 8 AM Breakfast, 10 AM -1 PM – Conference Inaugural, 1 PM Lunch, 2-4 PM- Honours and Awards Session, 4.30 – 6 PM – Paper Reading Session, 7.30 PM – Dinner.

18/8/2019 7 AM – Breakfast, 8 – 3 PM – Kavi Sammelan and Lunch on Sahitya Rath, downtown Toronto. Back to Hotel

19/8/2019 7 AM – Breakfast, 9 AM – Niagara Falls visit, 10 PM return to hotel

20/8/2019 8 AM – Breakfast, 10 AM – 21 PM – Visiting Vaughn City Mall, 3 PM – back to airport.

संपर्क: सरन घई, विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा

001-647-993-0330, internationalhindicanada@gmail.com

प्रो. कामराज सिंधु, ग्लोबल हिंदी साहित्य शोध संस्थान, भारत +91 94160 90378 globalhindisahityakkr@gmail.com

साहित्य रथ – हिंदी साहित्य को अनूठा उपहार

      जिस प्रकार भारत में गणतंत्र दिवस के अवसर पर निकलने वाली परेड में विभिन्न राज्यों, सरकारी उपक्रमों, संस्थाओं आदि की झांकियां निकालते हैं, उसी तर्ज पर विश्व हिंदी संस्थान कल्चरल आर्गेनाइजेशन, कनाडा अपनी अनूठी प्रस्तुति “साहित्य रथ” नामक झांकी का कनाडा के टोरंटो शहर में भारत के स्वतंत्रता दिवस पर निकलने वाली परेड में प्रति वर्ष साहित्य रथ का संचालन कर विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार को एक नया आयाम दे रहा है।

      इस साहित्य रथ की एक अन्य विशेषता इस पर आयोजित होने वाला कवि सम्मेलन है। साहित्य रथ पर कवियों को सहूलियत से बैठा दिया जाता है और वे टोरंटो की सड़कों पर हजारों की तादाद में खड़े श्रोताओं व दर्शकों के मध्य अपनी कविता पढ़ते हुए हिंदी की वैश्विक पहचान बनाने का एक सफल प्रयास करते हैं। इस प्रकार साहित्य रथ पर देश-विदेश से आये हुए कविगण खुले मंच से अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय करवाते हैं और साथ ही साथ टोरंटो के आसमान को भरत माता की जय, वंदे मातरम और्र जय भारत – जय भारती के नारों गुंजायमान करते हैं।   

विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा की साहित्य रथ संबंधी इस सोच का सर्वप्रथम प्रदर्शन भारत में राजस्थान स्थित डूंगरपुर शहर में 2016 की गणातंत्र दिवस परेड में हुआ था। उसके बाद से 2017, 2018 में लगातार क्रम में साहित्य रथ कनाडा में पूरी आन-बान-शान के साथ हिंदी को गौरवान्वित करता आ रहा है।

इस वर्ष 2019 में 18 अगस्त को टोरंटो डाउन टाउन में साहित्य रथ अपनी पूर्ण आभा के साथ संचालित होगा जिसमें द्वितीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्यिक सम्मेलन, 2019 में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को सादर विराजमान किया जायगा और उन्हें काव्यपाठ का अवसर प्रदान किया जायगा।

साहित्य रथ पर आप सबकी उपस्थिति सादार प्रार्थित है।

“ग्लोबल बुक आफ़ लिटरेचर रिकार्ड्स”

प्रिय साहित्यप्रेमी मित्रों

वर्ष २०१९ के लिये “ग्लोबल बुक आफ़ लिटरेचर रिकार्ड्स” के लिये सर्वाधिक लोकप्रिय महिला  साहित्यकारों की अंतिम नाम सूचि लगभ्ग तैयार हो चुकी है और अतिशीघ्र प्रकाशित कर दी जायगी। जिस दिन हमने १०० साहित्यकारों की सूचि पूर्ण होने की सूचना दी थी, वास्तव में उस समय ९८ नाम आ चुके थे और दो नामों के लिये व्हाट्स ऐप पर सूचना आ चुकी थी लेकिन क्योंकि हमने प्राथमिकता के अनुसार वही नाम चुनने थे जो  ई-मेल के द्वारा आये और जब ई-मेल खोल कर देखी तो १३ प्रस्ताव एक साथ आये हुए थे।

हम यह कर सकते थे कि पहले दो नाम लेकर बाकी सब छोड़ देते लेकिन वह न हमें और न हमारे सहयोगी निर्णायक मंडल को न्यायोचित लगा और यह निश्चित किया गया कि उस दिन तक आये सभी नाम सूचि में लिये जायें और नतीजतन १११ नामों की शुभ संख्या पर जाकर यह गिनती पूरी हो गई।

तो अंतिम १११ की सूचि प्रकाशित करदी गयी है। जिनके नाम इस सूचि में हैं, उनको बधाई क्योंकि आगे अतिलोकप्रिय ११ के लिए वोटिंग उन्हीं में से होगी और जिनके नाम नहीं आ सके हैं, उनसे हम हृदय से क्षमाप्रार्थी हैं।

वोटिंग में बस एक छोटा सा परिवर्तन यह होगा कि पहले १०० में से १० अतिलोकप्रिय नाम चुनने थे अब १११ में से ११ । सभी अतिलोकप्रिय ११ को सम्मानित किया जायगा और फिर उनमें से कोई एक सर्वाधिक लोकप्रिय महिला साहित्यकार होगी इस वर्ष की स्टार जिसके नाम पर “प्रयास” का पूरा अंक प्रकाशित होगा, उसे सम्मानित किया जायगा और उसके नाम की नामपट्टिका बनवायी जायगी जो उसके घर के बाहर शोभायमान होगी।

हां, एक बात और, सूचि अब पूर्णत: तैयार हो चुकी है अतएव जो लोग अभी तक नामों का प्रस्ताव भेज रहे हैं, कृपया न भेजें क्योंकि १११ के बाद अब हम नये नाम नहीं ले रहे हैं।

और हां, सभी प्रस्तावित व प्रस्तावक सूचि में यह देखलें कि उनका नाम सही से आया है, प्रस्तावित साहित्यकार के शहर का नाम सूचि में है और उसका परिचय हम तक भिजवाया जा चुका है ।

 – निर्णायक मंडल, ग्लोबल बुक आफ़ रिकार्ड्स, २०१९ 

सदस्यता शुल्क

१. वार्षिक सदस्यता शुल्क         :         1100 भारतीय रुपये अथवा २५ कैनेडियन डालर २.

वर्षीय सदस्यता शुल्क            :         5,100 भारतीय रुपये अथवा १०० कैनेडियन डालर

३. आजीवन सदस्यता शुल्क     :         10,100 भारतीय रुपये या २०० कैनेडियन डालर 

टिप्पणी: * सदस्यता शुल्क की उपरोक्त दरें भारतीय रुपये व कैनेडियन डालर की लगभग सममूल्य दरें हैं व केवल आन्टेरियो, कनाडा से बाहर के क्षेत्रों व भारत सहित अन्य देशों के सदस्यों के लिये हैं।

 * आन्टेरियो, कनाडा में एक व्यक्ति का सदस्यता शुल्क $25 तथा दम्पति के लिये $40 है।

विश्व हिंदी संस्थान कल्चरल आर्गेनाईज़ेशन, कनाडा

ब्रैम्प्टन, कनाडा में स्थित व कनाडा सरकार द्वारा पंजीकृत “विश्व हिंदी संस्थान कल्चरल आर्गेनाईज़ेशन” हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार में रत संस्था है जिसका ध्येय वाक्य है – हिंदी का सूर्य कभी अस्त नहीं होता है। हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व भाषा व संयुक्त राष्ट्र संघ के पटल पर सुशोभित मान्यताप्राप्त भाषा के पद पर स्थापित हुआ देखना ही इस संस्था का परम उद्धेष्य है।

विश्व हिंदी संस्थान द्वारा इस उद्देष्य की आपूर्ति के लिए सभी प्रयास वैश्विकता को अंतर में समेटे हैं फिर चाहे वह विश्व की सबसे लंबी कविता ’मुक्तिपथ-प्रेमपथ महाकाव्यगीत’ हो, चाहे विश्व में पहली बार एक साथ ६६ लेखकों द्वारा रचा गया उपन्यास ’खट्टे-मीठे रिश्ते’ हो, विश्व का पहला व अनूठा कहानी संग्रह जिसमें ३४ कहानीकारों ने एक ही विषय पर ’सुनो, तुम मुझसे झूठे तो नहीं बोल रहे! नामक कहानी संग्रह हो, साहित्यजगत की अनूठी परिकल्पना पहियों पर कविता ’साहित्य रथ’ हो, या पानी पर कविता ’साहित्य नौका’ हो या स्ववित्तपोषितता पर आधारित कनाडा में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला ’अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्यिक सम्मेलन’ हो।

सोशल मीडिया पर लगभग एक लाख की साहित्यिक मित्र संख्या पर पहुंचने वाली संस्था ’विश्व हिंदी संस्थान’ संपूर्ण विश्व में हिंदी की पताका फहराने हेतु यथासंभव तत्पर है। 

मुक्तिपथ-प्रेमपथ महाकाव्यगीत

३३३० पंक्तियों से सजी विश्व की सबसे लंबी काव्यरचना

छुअन

सरन घई का कविता संग्रह (प्रकाशनाधीन)

राजद्रोही

एक ऐसे मुजरिम की कहानी पर रचा उपन्यास जो अपने लिये उस खता के लिये फांसी की सजा मांगता है जो उसने किया ही नहीं।

खट्टे-मीठे रिश्ते

विश्व का प्रथम साझा उपन्यास जिसे ६६ रचनाकारों ने मिलकर लिखा है।

सुनो, तुम मुझसे झूठ तो नहीं बोल रहे!

विश्व का प्रथम साझा कहानी संग्रह जिसमें ३४ कहानीकारों ने एक ही विषय ’सुनो, तुम मुझसे झूठ तो नहीं बोल रहे/रही” पर कहानियां लिखी हैं। 

प्रयास –The Effort

हिंदी प्रचार हेतु अंतरराष्ट्रीय प्रयास

प्रयास” – The Effort” विश्व हिंदी संस्थान कल्चरल आर्गेनाईजेशन, कनाडा का प्रकाशन 

प्रो. सरन घई

M.A. History, Hindi, English, Ph.D.

Brampton, Ontario, Canada

      स्वर्गीय श्रीमती इकबाल कौर व पिता स्वर्गीय श्री जगजीत सिंह, पेशे से इंजीनियर व उर्दू-फ़ारसी के शायर के पुत्र सरन घई का जन्म जून १५, १९५० को जयपुर, राजस्थान, भारत में हुआ। हायर सैकंडरी तक शिक्षा प्राप्त कर भारतीय टेलीकाम्युनिकेशन विभाग, जयपुर राजस्थान में २५ वर्ष तक टेक्निकल सुपरवाइज़र के पद पर कार्य करके १९९१ में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर १९९१ से १९९६ तक जीटी टेक्निकल एजूकेशन बोर्ड में डायरेक्टर प्राजेक्ट्स का पद संभाला। जीवन में आगे की पढ़ाई नौकरी के साथ-साथ पूरी की जिसमें इंटरमीडिएट, बी ए, तथा इतिहास, हिंदी व अंग्रेजी विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई भी शामिल है।

इसके पश्चात जीवन के दूसर्रे पड़ाव में मई १९९६ में कनाडा, अमेरिका को अपना बसेरा बनाया। १९९६ से १९९९ तक न्यूयार्क, अमेरिका में रहकर ’एशिया आब्ज़र्वर’, व ’इंडिया पोस्ट’ समाचार पत्रों, तथा ’कश्मीर टुडे’, व ’ग्लोबल ट्रेड टाइम’ पत्रिकाओं का संपादन किया। कालांतर में ’इंडिया पोस्ट’ समाचार पत्र को कनाडा में लांच किया।

१९९९ से २०१० तक कनाडा में ’नमस्ते कनाडा’ नामक हिंदी-अंग्रेजी पाक्षिक समाचार पत्र का प्रकाशन-संपादन किया। इसके बाद समय-समय पर ’द हाईवे एक्सप्रेस’ व ’आस्क मी बिज़’ समाचार पत्रों व ’सौभाग्य’ तथा ’सुपीरियर स्टार’ पत्रिकाओं का संपादन-प्रकाशन किया। लगभग तीन वर्ष तक मनोरंजक टीवी शो ’क्या सीन है’ तथा ’क्या बात है’ का निर्माण-दिग्दर्शन व बाद में सीनियर्स की समस्याओं पर आधारित एक टीवी शो की प्रस्तुति की। रेडियो पर ’खुशियां’ नामक रेडियो शो का संचालन किया। वर्तमान में सन २०१३ से हिंदी-अंग्रेजी की मासिक ई-पत्रिका “प्रयास – The Effort” के संपादन-प्रकाशन जारी है।

इससे पूर्व भारत में निवास के दौरान हिंदी व अंग्रेजी व्याकरण, सामान्य ज्ञान, इतिहास, पर्यावरण, लेप्रोसी, व एड्स पर लगभग ५० किताबें प्रकाशित हुईं तथा ’पी एस सी क्रानिकल’ व ’फ़्लुएंट इंगलिश’ पत्रिकाओं का संपादन किया।

कनाडा में सन २००४ से २०१० तक यूनिवर्सिटी आफ़ टोरंटो, कनाडा में हिंदी अध्यापक के पद पर हिंदी पढ़ाने का कार्य किया। सन २०१३ में कनाडा में ’विश्व हिंदी संस्थान कल्चरल आर्गेनाईज़ेशन’ की स्थापना की जिसका उद्धेष्य हिंदी को भारत में राष्ट्र भाषा के पद पर सुषोभित करवाने हेतु प्रयास करना व इसे संसार में एक विश्व भाषा के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्याता प्राप्त भाषाओं की सूचि में शामिल करवाना है।

विश्व हिंदी संस्थान के कार्यकलापों के अंतर्गत समय-समय पर कवि सम्मेलन करवाने के साथ-साथ कनाडा में प्रतिवर्ष “अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्यिक सम्मेलन” का आयोजन करना, टोरंटो में भारत के स्वतंत्रता दिवस पर इंडिया डे परेड के अंतर्गत प्रतिवर्ष साहित्य की झांकी ’साहित्य रथ’ का संचालन करना प्रमुख गतिविधियां हैं। संस्था के कार्यकलापों के अंतर्गत प्रकाशन क्रम में विश्व की सबसे लंबी कविता “मुक्तिपथ-प्रेमपथ महाकाव्यगीत”, फ़िल्मी उपन्यास ’राजद्रोही’, विश्व का सबसे पहला ६६ उपन्यासकारों की संयुक्त कृति उपन्यास ’खट्टॆ-मीठे रिश्ते’ तथा ३४ कहानीकारॊं की संयुक्त कृति विश्व का पहला कहानी संग्रह जिसमें सभी कहानीकारों ने एक ही विषय ’सुनो, तुम मुझसे झूठे तो नहीं बोल रहे!’ का संपादन प्रकाशन हुआ। काव्य संग्रह ’छुअन’ शीघ्र प्रकाशनाधीन है।

संस्था ने अनेकों साहित्यिक विभूतियों को ’विश्व हिंदी साहित्यरथी सम्मान’ व ’विश्व हिंदी साहित्य स्तंभ सम्मान’, आजीवन हिंदी सेवी सम्मान के साथ-साथ ’ग्लोबल बुक आफ़ लिटरेचर अवार्ड’ भी प्रदान किया है।   

Saran Ghai

हिंदी का सूर्य कभी अस्त नहीं होता है – प्रो. सरन घई 

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